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जानिए ब्लैक फंगस और वाइट फंगस में अंतर, लक्षण और उपचार

Covid-19

Hindi News Website | Latest News – केंद्र सरकार ने बीते गुरुवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से महामारी रोग अधिनियम के तहत म्यूकोर्मिकोसिस ब्लैक फंगस को एक महामारी घोषित करने का आग्रह किया था, जिसमें कहा गया था कि संक्रमण लंबे समय तक कोरोना मरीजों में मृत्यु दर का कारण बनता जा रहा है। जबकि वाइट फंगस के मामलों की रिपोर्ट ने भी चितांजनक है क्योंकि वाइट फंगस ब्लैक फंगस की तुलना में अधिक खतरनाक बताया जा रहा है।

वाइट फंगस

विशेषज्ञों के अनुसार, वाइट फंगस का संक्रमण ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि इसका असर सीधा फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों पर तीव्र प्रभाव  से पड़ता है। वाइट फंगस अत्यधिक खतरनाक होता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को बहुत नुकसान पहुंचाता है। यह मस्तिष्क, श्वसन अंगों, पाचन तंत्र, गुर्दे, नाखून या यहां तक ​​कि निजी अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

हाल ही में विहार के पटना में मिले 4 वाइट फंगस के मामलें सामने आये जो कि कोरोना के मरीज नही रहें, इससे साबित होता है वाइट फंगस किसी भी व्यक्ति पर अपना प्रभाव डाल सकता है इसलिए सभी को सर्तक रहने की आवश्यकता है।

ब्लैक फंगस

Hindi News Website – जैसा कि ब्लैक फंगस और म्यूकोर्मिकोसिस के मामले पूरे देश में चिंता का विषय बने हुऐ हैं, एम्स के डायरेक्टर डा0 रणदीप गुलेरिया ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ब्लैक फंगल संक्रमण नया नहीं है, लेकिन कोरोना के साथ-साथ इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। डा0 रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ब्लैक फंगस के मामलों के पीछे स्टेरॉयड की अधिक डोज प्रमुख कारणों में से एक है।

ब्लैक फंगस शरीर के चेहरे, नाक, आंख व मस्तिष्क को प्रभावित करता है। इससे आंखो से देखने की क्षमता भी खत्म हो सकती है व फेफड़ो पर भी असर होता है। डायबीटिज के मरीजों को इसमें खास ध्यान रखने की आवश्यकता है।

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वाइट फंगस का खतरा किसे ज्यादा होता है?

Hindi News Website – विशेषज्ञों के मुताबिक कम प्रतिरोधक क्षमता वालें लोगो को वाइट फंगस का अत्यधिक खतरा होता है। यह पानी या अत्यधिक प्रदुषण के संपर्क में आने से भी हो सकता है। इसे संक्रमण नही कह सकते क्योंकी यह मनुष्य से मनुष्य को नही फैलता है बल्कि यह संक्रमित के शरीर के अंदर अत्यधिक मात्रा में फैलना शुरू कर देता है।

सबसे अधिक खतरा कम प्रतिरोधक क्षमता, मधुमेह व कैसंर के रोगियों को ज्यादा रहता है।

ब्लैक फंगस का खतरा किसे ज्यादा होता है?

शुगर के रोगियों, कोरोना रोगियों और स्टेरॉयड पर रहने वाले लोगों और अधिक समय तक आईसीयू में वाले मरीजो को ब्लैक फंगस होने का अधिक खतरा होता है।

वाइट फंगस के उपाय व लक्षण

वाइट फंगस संक्रमित मरीजों में कोरोना के समान लक्षण दिखाई देते हैं। विहार, पटना के अस्पताल में रिपोर्ट किए गए चार वाइट फंगस के मामलों में से कोरोना से संबंधित लक्षण दिखाई दिए, लेकिन चारो में कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन चारो मरीजों के फेफड़े संक्रमित पाए गए। इससे प्रतीत होता है कि वाइट फंगस के लक्षण कोरोना के सामान ही होते है।

सभी मरीजो को तुरंत अंटीफंगल दवाऐं देकर और चिकित्सक की देखरेख में रख कर सभी मरीजों का उपचार कर डिस्चार्ज कर दिया गया।

ब्लैक फंगस के उपाय व लक्षण

यह केवल कोरोना संक्रमित मरीजों में पाया जा रहा है। जिसमें आखों मे परेशानी, खांसी, बुखार, सीने मे दर्द, खासीं में खुन व नाक का रंग बदलना ही इसके मुख्य लक्षण है।

ऐसे लक्षण प्रतीत होने पर मरीज को तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और चिकित्सक की सलाह पर एंटी फंगल दवाऐं शुरू कर देनी चाहिए।

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